‘आकाश’ ने बताई विवाह बंधन में बंधने वाली लड़की के पिता की स्थिति

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drama aakashउज्जैन। अभिनव रंग मंडल द्वारा आयोजित शरदोत्सव की समापन संध्या रंग बहारूल में लेखक डॉ. भावेन्द्रनाथ सैकिया द्वारा लिखे नाटक ‘आकाश’ (Drama Aakash) का मंचन हुआ। बहारुल इस्लाम द्वारा निर्देशित हास्यजनक कहानी ‘आकाश’ ने विवाह बंधन में बंधने वाली लड़की के पिता की स्थिति का वर्णन किया।

कालिदास अकादमी के नाट्यगृह में आयोजित नाटक का शुभारंभ मातृशक्ति सुधा शर्मा, नसीम भटनागर, श्रीमती शशि भूषण, कल्पना फडणवीस, पांखुरी जोशी, श्रीमती झमनानी, शुभधा जेजुरिकर द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया। अभिनव रंगमंडल प्रमुख शरद शर्मा ने बताया कि उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज (उ.प्र.) के सहयोग से हुए नाटक ’आकाश’ (Drama Aakash) की कहानी के मुख्य पात्र ज्योर्तिमय चौधरी को अज्ञात नाम से एक पत्र प्राप्त होता है जिसमें उनके भावी दामाद के प्रेम प्रसंगों का जिक्र होता है।

Drama Aakash : विवाह की सूचना से चौधरी जी की नींद उड़ गई

विवाह के मात्र छह दिन पहले प्राप्त इस सूचना से चौधरी जी की नींद उड़ जाती है। ऐसे ही एक रात वो इस पत्र से उठने वाली स्थितियों के विषय में सोचते हैं, सोचते-सोचते उन्हें अपनी बेटी के जन्म वे लेकर बड़े होने तक के कई खुशियों के अवसर याद आते हैं। वो सोचते हैं कि उन्होंने कितने लाड़-प्यार से बेटी को पाला है और अब उसे किसी चरित्रहीन के हाथों में कैसे सौंप सकते हैं? चौधरी जी के मन में पुरानी यादे घर बसाती रहती हैं और उन्हें अपनी जवानी के दिन भी याद आते हैं जब वो जवान थे और अकेले थे।

तब उनकी जिंदगी में भी कई औरतें आई थीं। सोच विचार के उपरांत उन्हें लगता है कि ऐसी बातें बहुत ज्यादा मायने नहीं रखती और ऐसा सोचकर वो राहत की सांस लेते हैं। चौधरी जी जब अपनी पत्नी को उठाकर स्वयं के चिंतामुक्त होने को बात करने ही वाले थे तभी उनकी पत्नी कहती हैं ’चिंता मत करो ऐसा हर एक के साथ होता है, भविष्य में सब ठीक ही होगा।’ पत्नी के ऐसे दार्शनिक विचारों से चौधरी जी शंकित हो उठते हैं और उनके दिमाग़ में पत्नी को लेकर एक नया कीड़ा काटना शुरू कर देता है।

स्टेज पर बहारुल इस्लाम, ईवा मोहंता, फ़िरुजा बेग़म, हिमाद्रि कौर, प्रियंकी, प्रार्थना देवी, डॉली देवी, जीत बरुआ, दिबोश ज्योति बरुआ, स्वागत भुयान, निर्मली सरमा, प्रशांत कलीता ने अभिनय किया वहीं स्टेज परे मंच प्रबंधन दिबोश ज्योति बरुआ, आलोकन कनु चौधरी, संगीत दिनेश काकाटी, वस्त्र विन्यास भगीरथी, नाट्यरूपांतरण- निर्देशन बहारुल इस्लाम का रहा।  बहारूल इस्लाम रंगमंच, टीवी और फिल्मों के एक महत्वपूर्ण अभिनेता और निर्देशक हैं। आपने देश के महत्वपूर्ण नाट्य संस्थान राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से पास होने के बाद, रंगमंच को ही अपना जीवन समर्पित किया है।

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