कांग्रेस का निशाना, सिंधिया को उनके गढ़ में हराना, कांग्रेस का 16 सीटों पर सबसे ज्यादा फोकस

कांग्रेस सिंधिया

ग्वालियर. सरकार गिराने के जिम्मेदार सिंधिया पर कांग्रेस शुरू से ही तिरछी नजर लगाए बैठे है, लेकिन बाद में स्थिति बदलती दिखी और पार्टी की ओर से हमले का निशाना बदलकर शिवराज हो गए थे, लेकिन अब चुनाव की अंतिम बेला में ये बात उभरकर आ रही है,

कि कांग्रेस ने सिंधिया समर्थकों को चुनाव हरवाने पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। इससे ये भी पता चलता है कि भले ही कांग्रेस सरकार न बना पाए, लेकिन सिंधिया समर्थक न जीत पाएं। ये सारा खेल ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की सीटों पर चल रहा है।

जहां से लगभग सभी 16 सीटों पर सिंधिया समर्थक चुनाव लड़ रहे हैं। ग्वालियर-चंबल का इलाका सियासी अखाड़ा बना हुआ है, क्योंकि इस क्षेत्र से सिंधिया की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। कांग्रेस की कोशिश है,

कि इस क्षेत्र की ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर सिंधिया को भाजपा के अंदर कमजोर किया जाए। कांग्रेस की रणनीति पर गौर करें तो पार्टी ने लगभग चार माह पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता के.के. मिश्रा को इस क्षेत्र का मीडिया प्रभारी बनाकर तैनात कर दिया था.

और तभी से मिश्रा सिंधिया के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। मिश्रा ज्योतिरादित्य के जमीन से जुड़े मामलों से लेकर महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान पर भी खुल कर बोल रहे हैं। इतना ही नहीं, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, अरुण यादव से लेकर पार्टी के तमाम दिग्गज इस क्षेत्र में आकर ज्योतिरादित्य पर सीधा हमला बोल चुके हैं।

सौदे-बाजी से लेकर गद्दारी तक के आरोप कांग्रेस की ओर से जितने भी नारे बनाए जा रहे हैं, वे सभी ज्योतिरादित्य और उनके समर्थकों पर ही केंद्रित हैं। इन नारों में सौदेबाजी से लेकर गद्दारी तक के आरोप कांग्रेस सिंधिया पर लगा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव ज्योतिरादित्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि कांग्रेस की सरकार सिंधिया ने गिराई थी और अब भाजपा में अपनी राजनीतिक हैसियत भी बनानी है। यही कारण है,

कि इस चुनाव में ग्वालियर-चंबल इलाके में भाजपा को मिलने वाली जीत और हार का ज्योतिरादित्य के राजनीतिक भविष्य पर बड़ा असर डालने वाली होगी। कांग्रेस के सूत्रों की मानें तो आगामी दिनों में पा्टी के वरिष्ठ नेताओं के इस क्षेत्र में दौरे संभावित हैं.

सभी नेताओं के निशाने पर सिंधिया ही होंगे। कांग्रेस के भीतर एक धड़ा ऐसा है, जिसका लक्ष्य कांग्रेस को फिर सत्ता में वापस लाने का नहीं, बल्कि ग्वालियर- चंबल इलाके में सिंधिया को हराने पर ज्यादा है। इसके पीछे भी वजह है। दरअसल, कुछ कांग्रेस नेताओं को लगता है कि सिंधिया का कद कम होने से उनका और उनके समर्थकों का कद बढ़ जाएगा।

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