उमा भारती और सिंधिया के बयानों के बदले रुख से मध्यप्रदेश में शिवराज के लिए संकट?

सिंधिया उमा भारती

भोपाल. मप्र के चुनावी अखाड़े में प्रचार के लिए उतरी पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेत्री उमा भारती द्वारा चार और ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा दिए एक बयान से कांग्रेस में खुशी छा गई है। सबसे ज्यादा प्रसन्न प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ हैं,

जो अकेले चुनाव में किला लड़ा रहे हैं। पार्टी के नेता इन बयानों को शिवराज सिंह पर सबसे बड़ा राजनीतिक संकट मान रहे हैं, जो चुनाव बाद उभरने वाला है। उमा भारती ने हाल ही में बयान दिए जिसमें पहला बयान- अब प्रचंड राजनीति करूंगी.

दूसरा बयान- अगला लोकसभा चुनाव लड़ंगी, तीसरा बयान-गोविंद राजपूत मेरे बुरे दिनों का साथी है। उसने भाजपा छोड़ने के बाद मेरे द्वारा निकाली गई. रामरोटी यात्रा को बुंदेलखंड में बहुत सहयोग किया और चौथा बयान- उप्र का चुनाव में भी मेरे नेतृत्व में ही लड़ा गया,

लेकिन मैंने सीएम बनने से इनकार कर दिया था। उमा के इन बयानों से भाजपा में काफी हलचल है। माना जा रहा है, कि उमा मप्र की राजनीति में सक्रिय हुई तो समस्याएं पैदा हो जाएंगी। शिवराज से नाराज नेताओं का जमावड़ा उनके पास लगेगा.

और वे भाजपा में एक नया शक्तिकेंद्र बन जाएंगी। उमा को जानने वाले उनकी इस नई रणनीति को लेकर एक और चौंकाने वाली अटकल लगा रहे हैं और वो ये है कि जिस तरह से वे ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों के चुनाव क्षेत्र में जा रही हैं और उन्हें अपना बता रही हैं,

उससे ये भी संकेत मिलता है, कि भविष्य में वे सिंधिया के साथ मिलकर प्रदेश की राजनीति में सीधा हस्तक्षेप करेंगी। इससे सबसे ज्यादा परेशानी शिवराज को होगी। भाजपा में हो रही इस उठापटक के संकेत को भांपकर।कांग्रेस में खुशी का माहौल बन गया है।

कई नेता मान रहे हैं कि ये भविष्य में यदि शिवराज सरकार बनी रही तो उसकी टांग खींचने का संकेत है।भाजपा में दूसरा गुट जिसमें उमा-ज्योति दोनों होंगे. पार्टी में तनाव और खींचातानी पैदा करेंगे।

ये कहा था सिंधिया ने

सिधिया ने ग्वालियर में ये कहकर भाजपा नेताओं के माथे पर चिंता और कांग्रेस नेताओं के माथे पर खुशी की लहर दौड़ा दी कि आप पार्टी को भूल जाइये. केवल सिंधिया को याद रखिए। मेरी प्रतिष्ठा का सवाल है। सिंधिया भाले ही ऊपरी तौर पर खुद के नाम पर बोट मांग रहे हों, लेकिन माना जा रहा है कि,

वे भाजपा से ये कहना चाहते हैं कि चुनाव के बाद उनकी उपेक्षा की गई तो समझ लें कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में आज भी उनका सिक्का चलता है। इसे इसी संदर्भ में देखकर कांग्रेस के नेता प्रसन्न हैं। वे मान रहे हैं कि उमा और ज्योति मिलकर ही भाजपा की स्थिति को कमजोर कर देंगे, और इसका सीधा फायदा काग्रेस को मिलेगा।

सागर से चुनाव लड़ सकती हैं उमा भारती

उमा भारती के संकेत से अर्थ ये लगाया जा रहा है कि वे सागर से लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं। ये बुंदेलखंड में है. और उमा बुंदेलखंड का बड़ा चेहरा हैं। उनके समाज के लोगों की बहुतायत हैं। हाल ही में दो विधायक प्रद्मुम्नसिंह लोधी और राहुलसिंह लोधी उनके कहने पर ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए हैं। इससे पता चलता है कि उमा समाज की आज भी एकछत्र नेता हैं।

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