समय सीमा में यह न करने पर, धारा 439(2) के तहत, जमानत रद्द कर सकता है हाईकोर्ट

धारा

प्रदीप मिश्रा इंदौर. निर्धारित समय सीमा में चालान न प्रस्तुत करने की वजह से crpc की धारा 167(2) के तहत अभियुक्त दी गई डी-फॉल्ट जमानत को हाई कोर्ट crpc की धारा 439(2) के तहत रद्द कर सकती है सुप्रीम कोर्ट ने दिया फैसला

पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट की तीन जजो की बेंच ने बंगलौर हाईकोर्ट द्वारा ड्रग्स मामले के आरोपियों को crpc की धारा 167 (2)के तहत मंजूर की गई नियमित जमानत को रद्द करने के फैसले को सही करार देते हुए कहा,

कि यदि कोई व्यक्ति धारा 167 (2) के तहत जमानत पर अवैध या गलत तरीके से रिहा होता है तो crpc की धारा 439(2) के तहत उचित आदेश जारी करके उसकी जमानत निरस्त की जा सकती है। चूंकि उपरोक्त ड्रग्स तस्करी के केस में अपराध की कड़ियां कई राज्यों में जुड़ी हुई थी।

इस वजह से नार्कोटिक्स मामलों में निर्धारित 180 दिन के भीतर पुलिस द्वारा चालान प्रस्तुत न कर पाने की वजह से अभियुक्तों को crpc की धारा 167 (2) के तहत जमानत मिल गई थी। बाद में पुलिस द्वारा बंगलौर हाईकोर्ट मे जमानत रद्द करने की याचिका दायर की गई थीं,

जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर करते हुए आरोपियों की जमानत रद्द कर दिया था। और जब आरोपियों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दायर की तो 3 जजो जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एम. आर. शाह की बेंच ने आरोपियों की याचिका को खारिज कर बंगलौर हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया।

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