पिताजी ने युवाओं को दिखाया रोजगार का यह नया रास्ता, तो बेटों ने किया ये काम

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  • नई सोच- क्षत्रिय मराठा समाज उपाध्यक्ष ने पुरानी मान्यताओं को त्यागकर पिताजी की स्मृति में समाज में नई पहल शुरू की, किया पौधारोपण, रक्तदान और आज समाजजनो को वितरित करेंगे मास्क व सेनेटाइजर।

खरगोन. पुरानी कुरितियों को त्यागकर समाज को नई दिशा दिखाने का एक उदाहरण शहर मे भी दिखाई दिया। यहां बेटे व परिजनों ने पिताजी की स्मृति में समाज में नई सोच व जागरूकता की मिसाल पेश की।

परिजनों ने पौधारोपण और रक्तदान तो किया ही साथ ही कोरोना वायरस से बचाव की जागरूकता के लिए समाज जनो को मास्क और सेनेटाइजर भी बांटने का निर्णय लिया। जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कुंदा नगर निवासी अनिल कोकणे के पिता श्री मधुसुदन कोकणे का देहावसान पिछले दिनों हुआ।

वे 82 वर्ष के थे। सामाजिक परंपरानुसार श्री कोकणे ने पुरानी कुरितियों को त्यागकर शनिवार को पिता की स्मृति में गायत्री वृक्षतीर्थ मेहरजा में पौधारोपण किया। साथ ही गौ दान कर गायों की सेवा के लिए सहयोग कर श्रृद्धांजलि दी।

वही समाज जनों और परिजनों ने जिला अस्पताल में पिता की स्मृति में रक्तदान किया। रक्तदान के पष्चात पोते ओमित कोकणे, आयुष कोकणे, नाती चेतन बनकर व योगेन्द्र बनकर ने बताया कि दादाजी का जीवन साधारण जरूर रहा,

लेकिन उनके विचारों में हमेशा सदभावना, देशसेवा, प्रकृति व संस्कृति के संरक्षण का संदेश मिलता रहा। श्री कोकणे ने बताया वर्तमान में कोरोना महामारी के संक्रमण से कई परिवार अस्त व्यस्त हो रहे हैं। ऐसे में महामारी से बचाव की जागरूकता जरूरी है।

कोरोना महामारी से जागरूकता के लिए आज समाजजनों को मास्क और सेनेटाइजर वितरित कर जागरूकता संदेश भी दिया जाएगा। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग आदि की जानकारी भी देंगे। इस दौरान क्षत्रिय मराठा समाज के समाजजन व गायत्री परिजन मौजुद रहे।

पिताजी ने युवाओं को दिखाई रोजगार की राह

क्षत्रिय मराठा समाज के वयोवृद्ध स्व श्री मधुसुदन कोकणे का जीवन सामाजिक कार्यों में ही रहा। उनके बेटे अनिल कोकणे ने बताया कि पिताजी का जन्म आजादी के पूर्व वर्ष 1939 में हुआ। वे महात्मा गांधी, भगतसिंह, सरदार वल्लभभाई पटेल, चंद्रशेखर आजाद आदि महापुरूषों को अपना आदर्श मानते थे।

वे रोजगार कार्यालय में कार्यरत थे। वे 1997 में बुरहानपुर में कार्यरत होकर सेवानिवृत हुए। उनका 25 वर्षों का कार्यकाल खरगोन जिले में ही रहा। उस समय में संचार साधनों के आभाव के कारण कई योग्य युवाओं को रोजगार की जानकारी नहीं मिल पाती थी।

पिता जी समस्त समाजों के युवाओं को विभिन्न शासकीय-अशासकीय सेवाओं और उनकी अनिवार्य योग्यताओं की जानकारी भी देते थे। उनके मार्गदर्षन से कई युवाओं ने विभिन्न विभागों में रोजगार भी पाया। मराठा समाज के योगेश वाघ, अनिल ओगले आदि बताते हैं,

कि स्व. श्री कोकणे ने क्षत्रिय मराठा समाज की साख संस्था का संचालन कर समाज को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए भी प्रयास किए। समाज के लोगों के एकीकरण, शिक्षा का प्रसार, नवीन धर्मशाला बनाने आदि सामाजिक कार्यो में भी स्व श्री कोकणे का योगदान सराहनीय रहा है.

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