कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के नाम पर हुई धोखाधड़ी, तरीका पढ़ आप भी हो जाएंगे हैरान

पंडित प्रदीप मिश्रा

सीहोर। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के नाम पर ठगी का मामला पांच जनवरी को सामने आया तो समिति ने मंडी थाने में दो आरोपियों को नामजद करते हुए शिकायत दर्ज करायी थी, जिसमें आरोपियों ने श्रद्धालुओं के नाम पर ठगी कर ऑनलाइन पैसे वसूले।

पंडित प्रदीप मिश्रा की पुस्तकें और रुद्राक्ष

शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मंडी थाना पुलिस ने दो आरोपियों को राजस्थान से गिरफ्तार किया है, जबकि कोर्ट से 19 जनवरी तक पीआर पूछताछ की जा रही है, लेकिन दोनों आरोपी अभी यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि लोगों के खातों में कितने पैसे जमा हुए हैं।

पंडित प्रदीप मिश्रा

महाराज के नाम से बनाई फर्जी वेबसाइट

थाना प्रभारी मंडी हरि सिंह परमार ने बताया कि पंडित के नाम पर ठगी का मामला सामने आने के बाद. रिकॉर्ड किया गया था। इसके बाद आरोपी विकास विश्नोई और मदनलाल निवासी जालोर राजस्थान को गिरफ्तार कर लिया गया।

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आरोपी प्रसिद्ध कथाकार पंडित प्रदीप मिश्रा के भक्तों के नाम से फर्जी वेबसाइट व वाट्सएप ग्रुप बनाकर ठगी कर रहे थे। दो बदमाशों ने पं. प्रदीप मिश्रा द्वारा लिखित रुद्राक्ष व पुस्तकें दिलाने के नाम पर उनके भक्तों से 500-500 रुपये मांगे थे।

पैसा निकालने के लिए उनके क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया

आरोपियों ने पंडित प्रदीप मिश्रा के क्यूआर कोड की जगह उनके क्यूआर कोड का इस्तेमाल ठगी करने के लिए किया, जिसमें पैसे जमा किए जा रहे थे. मंडी पुलिस ने दोनों आरोपियों को राजस्थान से गिरफ्तार कर सोमवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अर्चना नायडू बोडे की अदालत में पेश किया।

अदालत ने दोनों आरोपियों को 19 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 468, 469, 471 और आईटी एक्ट की धारा 66-सी, 66-डी भी जोड़ी गई थी।

फर्जी आईडी बैंकर की धोखाधड़ी

उल्लेखनीय है कि विट्ठलेश सेवा समिति के सदस्य समीर शुक्ला ने 5 जनवरी को थाना मंडी में शिकायत की थी कि राजीवनगरपुर जिला-जालौर राजस्थान निवासी आरोपी विकास विश्नोई ने फोटो डालकर वेबसाइट व वाट्सएप ग्रुप बना लिया है।

पंडित प्रदीप मिश्रा का और आस्था लाइव का लोगो

उसने समिति के क्यूआर कोड की जगह अपना क्यूआर कोड लगा दिया है। उसके जरिए वह गुरुजी की लिखी किताब और रुद्राक्ष मंगवाने के लिए भक्तों से 500-500 रुपए वसूल रहे हैं। जब यह राशि समिति के बैंक खाते में नहीं आई तो उसके द्वारा वाट्सएप ग्रुप पर दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया तो उक्त फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

आरोप है कि फर्जी आईडी के जरिए लाखों रुपए की ठगी की गई है। इस मामले में एएसपी जीके गर्ग का कहना है कि पीआर को लेकर पूछताछ की जा रही है. अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि लोगों के खाते में कितने पैसे जमा हुए हैं।

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