उज्जैन का सुशांत था गोविंद, जाँच की आँच से जल्द बाहर आ सकता है सच

गोविंद

जय कौशल उज्जैन. गोविंद नाम के एक युवा दिलदार सिंधी व्यापारी की 8 दिन पहले फाँसी लगा कर आत्महत्या की गुत्थी अब तक सुलझने में उलझने ज्यादा दिखाई दे रही हैं. और अगर हमारी आप सुधियों और मेरी पहल सटीक बैठे,

तो शायद मरहूम हो चुके एक युवा को मौत के बाद ही सही न्याय तो मिल ही सकता है और उसकी मौत के जिम्मेदारोंआरोपी को सज़ा हासिल हो सकती है. शक शुबा से शुरू हुआ मामला अब साफ सफाई से होते हुए चौपहिया तक तो पहुँच चुका है.

बस अब निष्पक्ष और बग़ैर न्यौछावर के अगर इस मामले में पुलिस अपना काम करे तो पूरे मामले का पर्दाफ़ाश हो सकता है.

उपहार या वसूली

सिंधी समाज के युवा व्यापारी गोविंद रामचंदानी ने करीब सप्ताह भर पहले अचानक फांसी का फंदा लगा कर मौत को गले लगा लिया था. इस मामले जीवाजीगंज पुलिस की तफ़्तीश रेंगते हुए ही चली. इसी बीच समाज के एक युवा की इस मौत से आहत कुछ समाज जनों ने हमसे संपर्क करके आत्महत्या की गुत्थी के कई राज बताए,

और शंका, शक, शुबे से होते हुए मामला एक ऐसी जगह पर जाकर रुका की हमारी तफ़्तीश को एक ऐसा सबूत मिला जो पिछले 8 दिन से दफ़्न था. जी हाँ इस मिस्ट्री भरे मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा बुधवार को उस वक़्त हुआ.

जब मरहूम गोविंद रामचंदानी की 25 लाख कीमत की बेशक़ीमती न्यू ब्रांड MG Hektor कार क्रमांक mp 09 we 0028 एकाएक सामने आ गई. ये कार एक अन्य साड़ी के व्यापारी के पास मिली. अब इतनी बेशक़ीमती गोविंद की ये कार उसकी मौत के 9 वें दिन सामने आना अपने आप में शक शुबा को जन्म तो देते ही हैं.और सवाल ये उठते हैं कि ये कार गोविंद की मौत के इतने दिनों बाद यकायक कैसे सामने आई ? ये कार अगर नरेश धनवानी के पास थी तो उनके पास क्यों ? और कैसे ? आई. और जब उन्हें पता था तो उन्होंने ने पुलिस या मृतक के परिजनों से बात क्यों छुपाई ?

क्या ये इतनी कीमती कार गोविंद ने ही नरेश को दी थी? या फिर नरेश ने गोविंद से ली थी? इस लेनदेन पर अब तक पर्दा क्यों डाला गया? क्या पुलिस को इस कार के विषय में इल्म था? और अगर था तो क्या पुलिस ने इस कार की बारीकी से जाँच की?

और अगर पुलिस को इसका पता नहीं था तो क्या पुलिस अब इस मामले में इस कार को अपनी जाँच में शामिल करेगी ? ये और ऐसे कई सवाल हैं जो ज़हनी तौर पर किसी भी जाँच में शामिल होने चाहिए. आगे देखते हैं इतना परोसा होने के बाद भी पुलिस इस पर क्या संज्ञान लेती है.

ज्ञान, संज्ञान का झोल और जाँच

यहाँ हम पुलिस पर किसी तरह आरोप लगाए बग़ैर उनके संज्ञान में कुछ मुद्दे लाना चाहते हैं. वो भी इसलिए कि इस मिस्ट्रिसियस केस में उन्हें गुत्थी सुलझाने में थोड़ी मदद मिल जाए. अब इस मामले में बारिकीयत बरती जाए,

तो मृतक का मोबाईल बहोत कुछ राज उगल सकता है. जो मेरे लिहाज़ से अभी तक पुलिस ने अपनी ज़ब्ती में ही नहीं लिया है.सूत्र बताते हैं कि गोविंद ने मृत्यु पूर्व एक तीन पन्नों का ख़त लिख छोड़ा था शायद जिसमें कई रसुखियों के नाम और उनकी करतूतों का बखान था.

जिसके चलते गोविंद ने इतना बड़ा कदम उठाया. हालांकि पुलिस को वो ख़त भी नहीं मिला है. वहीं गोविंद के ही परिजनों ने हमें ये बताया है कि उनके सिंधी कॉलोनी स्थित मकान पर एक डायरी थी जिसमें गोविंद लेखाजोखा लिख कर रखता था.

वो डायरी भी सोसाइट नोट की तरह ग़ायब है. वो भी बहोत कुछ उगल सकती थी. मतलब सीधा सा ये है कि ये मामला इतना सीधा नहीं है जितना इसे दर्शाया गया है या यूं कहें कि दर्शाया जा रहा है.

दाल में काला या काली दाल

अब हम आपको बताते हैं कि जिस काली कार का ज़िक्र हमने उपर किया वो नई नवेली बेशक़ीमती कार कुछ दिनों से साड़ी व्यापारी नरेश धनवानी के एलपी भार्गव नगर स्थित मकान पर खड़ी है और उक्त कार का बदस्तूर उपयोग धनवानी परिवार कर रहा है.

जब इस कार के नम्बरों को हमने खंगाला तो सच्चाई सामने आई कि उक्त कार 21 अगस्त को ही गोविंद रामचंदानी के नाम से उठाई गई थी. तो फिर ये कार गोविंद के घर की बजाए नरेश के घर क्या कर रही थी. और गोविंद की मौत के इतने दिनों बाद ऐसी क्या मजबूरी हो गई,

कि नरेश धनवानी को सोशल मीडिया पर गोविंद के पिता रमेश रामचंदानी से सफाई जारी करवाई कि गोविंद की कार नरेश के पास है. ये पूरा घटना क्रम कई सन्देहों को जन्म दे रहा है. जिसकी जाँच पोलिस को बारिकी से करने की ज़रूरत है. यहाँ दाल में काला नहीं बल्कि दाल पूरी ही काली बनाने की नाकाम कोशिश की गई है.

गोविंद की मौत को काली दाल बनाने की कोशिश, शंका में

एक बात और गौर करने वाली है कि कुछ दिन पूर्व नरेश धनवानी गोविंद की मौत को लेकर कुछ लोगों के साथ डीआईजी मनीष कपूरिया से मिला था और गोविंद की मौत का जिम्मेदार उसके ससुराल और पत्नी को बताया था.

ऐसी ही खबरें भी कुछ अख़बार में छपवाई गईं थीं. इसके बाद समाज और शहरभर ने ये मान लिया था कि ये मौत पारिवारिक कलह का परिणाम थी. लेकिन हमारी तफ़्तीश में दोनों परिवारों में अटूट प्रेम स्नेह सामने आया था.

लेकिन आप सुधियों के जलवे ने इस मामले में तड़तड़ी चलाई और कुछ ख़ुलासे किए, तो सच्चाई सामने आई. हालांकि अभी पूरी सच्चाई का पर्दाफाश होना बाकी है. लेकिन कईयों को नैतिकता का पाठ याद आ गया इन खुलासों से.

अनैतिकता और नैतिकता का पाठ

धीरे धीरे इस मामले की तह तक हम ठीक उसी तरह पहुंचने लगे हैं जैसे बरसों पहले तिहरे केसवानी हत्याकांड की अनसुलझी गुत्थी तक तात्कालीन पुलिस अधिकारी पहुंचे थे. लेकिन ख़ुलासे के पूर्व ही वो फाईल बन्द होकर गुमनानी में चली गई.

लेकिन अगर पुलिस चाहे तो अनैतिकता से भरे इस मामले में नैतिकता दिखाते हुए. गोविंद की मौत का पर्दाफ़ाश कर सकती है. वहीं नित नए खुलासों से बौखलाए नरेश धनवानी मीडिया को नैतिकता का पाठ पढ़ाते हुए सोशल मीडिया पर अपने वीडियो जारी कर रहे हैं.

जब कि नैतिकता का ज्ञान बांटने वाले नरेश धनवानी खुद दो दिन पहले तक मरहूम और उसकी पत्नी और ससुराल वालों को कटघरे में खड़ा कर रहे थे. अब ये मीडिया की खबरों को झूठा साबित करने में लगे हैं. हालांकि अब समाज भी जाग गया है.

गोविंद की संदिग्ध मौत को लेकर वरिष्ठों की निष्पक्षता की मांग

अब इस मामले को लेकर सिंधी समाज मे जागरूकता आ गई है समाज के अध्यक्ष शिवा कोटवानी और मोहन वासवानी ने प्रशासन से निष्पक्ष जाँच की मांग की है. समाज की ये चेतना कुछ तो रंग लाएगी.

हालांकि गोविंद की आत्महत्या मिस्ट्रिसियस है. और इसमें सूदखोरी, ब्लैकमेलिंग और लव स्केंडल के एंगल आ जाने के बाद इस उलझी हुई गुत्थी को सुलझाना पुलिस के लिए चुनौती साबित हो सकता है.

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