कैसे लड़ेंगे भ्र्ष्टाचार से? प्रदेश मे रिवॉल्विंग फंड की व्यवस्था नहीं! 6 जिलों मे करोड़ों रू मालखानों में कैद!

दिनेश पाटनी: मध्य प्रदेश लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू के पास दूसरे राज्यों की तरह रिवाॅल्विंग फंड‌ ना होने से 400 से ज्यादा फरियादियों की एक करोड़ से ज्यादा राशि फंसी पड़ी है। जिससे आरोपी को सजा मिलने तक फरियादी आर्थिक सजा भुगतने के लिए मजबूर है।

विदित है, मध्य प्रदेश में रिश्वतखोरों को पकड़वाने के लिए फरियादी द्वारा दी गई रकम, साल सालों बाद अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही मिल पाती है। जिसके रहते इंदौर, सागर, रीवा, जबलपुर, भोपाल लोकायुक्त में ही फरियादियों के एक करोड़ से ज्यादा मालखानों में कैद हैं।

किसी के 7 साल से 10 लाख फंसे तो कोई उधार ली राशि का भर रहा ब्याज

सनावद में 2015 मैं नरेंद्र शर्मा को 10 लाख की रिश्वत लेते लोकायुक्त द्वारा पकड़ा गया था। मुकदमे के दौरान ही फरियादी प्रवीण सिंह सोलंकी की मृत्यु हो गई। अब बेटे भानु प्रताप सिंह पैसे वापसी की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसा ही मामला धार के आदिवासी का है जिसने पटवारी को ट्रैप कराने के लिए 50 हजार उधार लिए। इस मामले में तो आरोपी पटवारी की तो कोविड से मौत हो गई। फरियादी ब्याज भर रहा है।

नियम 2 साल का, लेकिन लेकिन लग जाते हैं कई साल

लोकायुक्त अधिनियम में संशोधन कर निचली अदालतों में सुनवाई 2 साल में पूरी करने का प्रावधान किया गया है। पर सामान्य तौर पर कई साल लग जाते हैं। हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में लगने वाला समय अतिरिक्त है। उसके बाद ही कहीं जाकर फरियादी को उसका पैसा वह भी बिना ब्याज का वापस मिल पाता है।

लोकायुक्त और ईओडब्ल्यु पर है भ्रष्टाचार पर लगाम का जिम्मा

मप्र में भ्रष्टाचार पर लगाम का जिम्मा लोकायुक्त संगठन के पास है। रिश्वतखोरों को रंगे हाथों पकड़वाने (ट्रैप) के लिए रिश्वत की राशि का इंतजाम फरियादी को करना पड़ता है। इन नोटों में विभाग केमिकल लगाता है। जब्ती के बाद सबूत के तौर पर आरोपी के हाथ धुलवाए जाते हैं।

केमिकल लगे नोटों के कारण पानी रंगीन हो जाता है। जब तक मुकदमा चलता है, यही नोट Evidence के तौर पर Government माल खाने में Deposit करवा दिए जाते हैं। EOW भी पिछले कुछ समय से जाल की कार्यवाही करने लगी है। इसके पास भी 15 से ज्यादा फरियादियों के करीब 4 लाख फंसे हुए हैं।

इंदौर में लगभग 62 मामले हैं लंबित

मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार अधिनियम में इंदौर में भी लगभग 62 मामले लंबित हैं। 2021-22 में सिर्फ 15 मामलों का निपटारा हुआ। इंदौर में कोऑपरेटिव बैंक घोटाले का मामला तो 17 साल से निचली अदालत में ही है। पूर्व मंत्री रामेश्वर पटेल सहित 70% आरोपियों की मौत हो चुकी है।

लोकायुक्त DG Kailash Makwana कहते हैं फरियादी का रुपया फंस जाना, Corruption से निपटने की राहों में एक बड़ी समस्या है। परंतु नियमों में बंधे होने के वजह से हम बेबस हैं। रुपया फंसने के डर से बड़ी राशि के जाल भी नहीं हो पाते।मकवाना कहते हैं वे राजस्थान, हरियाणा मे भ्रष्टाचार विरोधी संस्था रिवाल्विंग फंड देने से जुड़े कानूनी पहलुओं का अध्ययन करेंगे। इसके बाद उचित फोरम पर भी अपनी बात रखेंगे।

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