इंदौर: कोरोना वायरस में उपयोगी रेमेडिसीवर इंजेक्शन का अभाव, दवा कंपनियां कर रही मनमानी

रेमेडिसीवर इंजेक्शन

राजेंद्र सचदेव इंदौर. मध्यप्रदेश के महानगर मुख्यमंत्री के सपनों के शहर इंदौर में कोरोना की बीमारी में लगने वाले एंटीवायरल रेमेडिसीवर इंजेक्शन का अभाव हो गया है, इंदौर में इस इंजेक्शन की उपलब्धता कठिन हो गई है.

कोरोना के इलाज के लिए अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा पर्ची पर लिखे गए इस रेमेडिसीवर इंजेक्शन को खरीद पाना मुश्किल हो रहा है. दवा की दुकानों पर यह इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है ,जनता भटक रही है, COVID-19 के इलाज करने वाली अस्पतालों में भी इसका अभाव है.

अस्पतालों में कमी बनी हुई है मरीज के परिजन दवा की दुकानों के चक्कर लगा कर परेशान हो चुके हैं इस इंजेक्शन का उत्पादन देश में चार कंपनियां कर रही हैं उनसे कहा गया है कि वह अपने पास निर्मित इंजेक्शन को COVID-19 का इलाज कर रही अस्पतालों को सप्लाई करें.

परंतु अस्पतालों में ही इन रेमेडिसीवर इंजेक्शन की कमी है, पर्याप्त इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है, एक मरीज को 6 इंजेक्शन लगाने की खुराक निर्धारित की गई है अस्पतालों में इस इंजेक्शन के अभाव के कारण एक या दो इंजेक्शन लग पा रहे हैं.

सरकारी अस्पतालों में COVID-19 के मरीजों को रेमेडिसीवर इंजेक्शन नहीं लगाया जा रहा है क्योंकि सरकारी खरीदी में इसे शामिल नहीं किया गया है मुख्यमंत्री सहित स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को इस इंजेक्शन की सरकारी खरीदी में शामिल करने के लिए काफी समय से मांग की जा रही है.

बाजार में रेमेडिसीवर इंजेक्शन की कीमत मिल रही अलग-अलग 

स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं, इस इंजेक्शन की कीमत अलग-अलग कंपनियों द्वारा अलग-अलग रखी गई है, दवा कंपनियों ने इस रेमेडिसीवर इंजेक्शन की कीमत 28000 से 60000 रखी है. देश में COVID-19 के बढ़ते संक्रमण के कारण इसकी मांग बढ़ गई है.

इसके पश्चात भी इसकी कीमत को कंट्रोल करने के लिए इस इंजेक्शन को मूल्य नियंत्रण कानून में शामिल नहीं किया गया है शासन को तुरंत इस इंजेक्शन की उपलब्धता सुगमता से कराई जानी चाहिए और दवा बाजार में दुकानों को निर्धारित कर इस इंजेक्शन की कालाबाजारी को रोका जाए. मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री प्रभु राम चौधरी इस और कृपया तुरंत ध्यान दें.

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