अवैध बोरिंग की कार्रवाई में इंदौर पुलिस, न्यायालय और संविधान से बड़ा?

बोरिंग


राजवर्धन शांडिल्य इंंदौर. इंदौर में शासन-प्रशासन के आदेशों को ताक पर रख बोरिंग मशीन संचालक अधिकारियों से सांठ-गांठ कर अवैध बोरिंग खनन का कार्य कर रहे है। हर वर्ष गर्मी के दिनों में पानी की समस्या को देखते हुए प्रशासन द्वारा बोर खनन व भवन निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाया जाता है,

पर चंद भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से सारे नियम कायदे और कानून व्यवस्था धरी कि धरी रह जाती है। बावजूद बिना प्रशासन की अनुमति के अवैध तरीके से बोर खनन की जा रही है। पुलिस द्वारा अवैध बोरिंग की सूचना पर जब कार्रवाई की बात आती है,

तो पुलिस कार्यवाही को लेकर संविधान और न्यायालय से बड़ी हो जाती है। गौरतलब है कि शहर में संविधान का अनुच्छेद और धारा पुलिस के लिए बौना हो जाता है। एक भी अपराध के लिए शहर में हर थानो में पुलिस अलग अलग धाराओं मे मुकदमा दर्ज करने काम करती है।

जबकि इसमे पर्यावरण भू संरक्षण अधिनियम 1986(15) के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है तो कहीं पेय जल अधिनियम 4/9 तो कहीं 188 की कार्रवाई के साथ ₹500 का जुर्माना लगाकर पुलिस वाहन चालक, प्लाट धारक व एजेंट को मुलजिम नही बनाते हुए,

चंद सिक्कों की खनक के आगे उन्हें संरक्षण देने का काम करती है तो ठीक वही अवैध बोरिंग की सूचना देने वाले सूचनाकर्ता पर अपने होने वाले कमाई पर बट्टा लगते देख अपराधियों से हमला करवाने का भी काम करवाती है।

आखिर ऐसे में रक्षक भक्षक बन जा रहे हैं। समाज को जिस व्यक्ति से रक्षा और न्याय की उम्मीद है वही अन्याय और भ्रष्टाचार करने का काम करते हैं।

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