प्रशासन की लापरवाही का शिकार पत्रकार, गुमटीधारी ने पत्रकार पर लट्ठ से किया हमला

पत्रकार

जय कौशल उज्जैन. शनिवार को एक बार फिर प्रशासन की अंकुशता के ढीलेपन और निरंकुशों के आवारापन का शिकार पत्रकार  से जुड़े उस व्यक्ति को होना पड़ा जो अपने अख़बार के लिए ख़बर लेने जा रहा था और उस पर अवैध गुमटीधारी ने जानलेवा हमला कर लहूलुहान कर दिया।

ये वाक्या या घटना या यूं कहें कि वारदात उस जगह हुई जहाँ देशभर के सैकड़ों पर्यटक दर्शनार्थी आते जाते हैं। ऐसे में एक नहीं कई सवाल कौंधते हैं कि धार्मिक नगरी में इस तरह के माहौल से बाहर के दर्शनार्थियों को भी दौचार तो होना ही होता होगा, ये घटना अतीत की कई घटनाओं को तो जिंदा कर ही गई,

और साथ ही अंकुशता और निरंकुशता की भी पोल खोल गई। वहीं करे कोई और भरे कोई की कहावत भी चरितार्थ कर गई , साथ ही इस पूरे मामले में नगर की व्यवस्था के ज़िम्मेदार नरकनिगम के बाघड़बिल्लों की करतूत फिर बेपर्दा हो गई ।

कसूर किसका और कसूरवार कौन??
दरअसल शनिवार की दोपहर को ख़बर आई कि चिंतामन मार्ग पर एक ट्रैक्टर ट्रॉली पलट गई है जिसमें एक व्यक्ति बेवक़्त काल के गाल में समा गया है। इस दुर्घटना का कवरेज़ करने नई दुनिया अख़बार के फोटो पत्रकार नैमिष (रिंकू) दुबे अपने दो पहिया वाहन से जा ही रहे थे,

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कि हरसिद्धि चौराहे के पास विक्रम टीले के सामने पत्रकार की गाड़ी एक अवैध गुमटी संचालक से टकरा गई । इसी बीच उस गुमटी संचालक ने नैमिष पर लठ्ठ से हमला कर दिया जिसमें नैमिष के सिर में गम्भीर चोट लग गई और वो लहूलुहान हो गए।

इस वारदात को अंजाम दे कर हमला मौके से रफूचक्कर हो गया। इस घटना की खबर लगते ही पत्रकार साथियों ने जैसे तैसे नैमिष को जिला चिकित्सालय पहुंचाया। इधर जैसे-जैसे ख़बर फ़ैली सभी पत्रकार साथी मौके पर इकट्ठा हो गए,

और अवैध अतिक्रमणकारी गुमटी माफियाओं को हटाने की मांग करने लगे। प्रेस क्लब और सिटी प्रेस क्लब के तमाम मीडिया कर्मियों की मांग पर वहाँ से सारी गुमटियां नगर निगम की कर्मचारी गैंग ने करीब एक घण्टे की मशक्कत के बाद हटा दी।

अब यहाँ सवाल ये उठता है कि इसमें कसूर किसका था और कसूरवार कौन है??? कसूर उस मीडिया कर्मी का था जो सीधे सीधे अपने काम से जा रहा था या कसूर उसका है जिसने इन अवैध अतिक्रमण कर्ताओं को यहाँ गुमटियां लगाने की परमिशन दी???

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दरअसल पूरे शहर में गुमटी माफियाओं को कुछ तो नरकनिगम के बाघड़बिल्लों और कुछ राजनैतिक केटलियों का वरदहस्त है ।

हौंसलों के पीछे माया का खेल

गुमटी माफियाओं के पीछे पूरा खेल उन सरमायादारों का है जो आर्थिक लोलुपता के मकड़ जाल में फंसे हैं और शासन की योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं। महाकाल मंदिर से हरसिद्धि मन्दिर पहुंच मार्ग पर लाखों ली लागत से सड़क के दोनों ओर सौदर्यीकरण और पाथ वे के साथ ही सुंदर बेंचें राहगिरों के सुस्ताने के लगाई गई थीं,

जो गुमटियों और दुकानों में लुप्त हो गईं थीं। जैसे ही नगरनिगम की कर्मचारी गैंग ने यहाँ से अतिक्रमण हटाया तो ये सौंदर्य उभर कर आ गया। लेकिन यहाँ अतिक्रमण करवाने में नगर निगम की दूसरी गैंग अर्थपिशाच गैंग का काम सामने आया है,

सूत्रों का कहना है कि झींझर कांड में शामिल बाजार वसूली (सराफा) बादशाह (औधा) का ही काम है,वसुलदारों ने ही सौंदर्यीकरण का अवैध सौदा करके अतिक्रमण करवाए ,वहीं एक सत्ताधारी नेता और उसकी केटलियां (गुर्गे) भी इसके लिए जिम्मेदार हैं

अतीत से भी नहीं लिया सबक

अब थोड़ा पीछे अतीत में चलते हैं ये जो घटना हुई उससे कुछ मीटर दूर महाकाल मंदिर के बाहर दो साल पहले ऐसे ही एक घटना हुई थी जिसमें फूल प्रसाद बेचने वाले ने एक दर्शनार्थी को जरा सी बात पर मौत के घाट उतार दिया था,

और शनिवार की घटना में भी वही हुआ धार्मिक समान बेचने वाले हमलावर ने हमला कर मीडियाकर्मी को घायल कर दिया, सूत्र बताते हैं कि यहाँ इन गुमटी वालों के पास हमेशा हथियार रहते हैं और जिस लठ्ठ से हमला किया गया।

उस तरह के लठ्ठ हथियार के तौर पर वारदातों में इस्तेमाल होते हैं और पुलिस उन्हें जप्ती दर्शा कर न्यायालय में पेश करती है जिससे आरोपी कई कई सालों तक जेल का हवा पानी लेने पहुँचते हैं , ऐसे हथियारों की यहाँ धार्मिक सामग्री बेचने वालों के यहाँ बेचे जा रहे हैं।

और समय समय पर ऐसे ही उनका इस्तेमाल भी किया जा रहा है वहीं एक बार फिर नरकनिगम के आलाओं की भी झींझर कांड की तरह अतिक्रमण पर निरंकुशता साफ ज़ाहिर हो गई, इस पूरे मसले को भोपाल और दिल्ली तक उठाया जाएगा।

आख़िर लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को कब तक इन घूसखोर अर्थपिशाच बाघड़बिल्लों और राजनैतिक केटलियों के लालच का ऐसे ही ख़ामियाजा भुगतना पड़ेगा??? अब पत्रकार सुरक्षा कानून को अमल में लाने की ज़ोरदार दरकार महसूस हो रही है और इसके लिए मीडिया के सभी साथियों को आवाज़ बुलंद करते हुए अपनी मांग को पुरज़ोर तरीके से उठानी होगी.