Navai festival: आदिवासी समाज का नवई पर्व शुरू, जाने पर्व की डिटेल

Navai festival

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  • परिवार स्थान देवता, ग्राम देवता के साथ मंदिरों में जाकर भगवान के चरणों में अर्पण कर रहे ककड़ी-भुट्टे।
  • अच्छे व्यापार-व्यवसाय के साथ क्षेत्र में खुशहाली और समृद्धि की प्रार्थना की जा रहीं।
  • पारंपारिक वाद्य यंत्रों और आदिवासी गीतों पर किया जा रहा नृत्य।

झाबुआ। शहर के नेहरू मार्ग स्थित प्राचीन श्री दक्षिणमुखी महाकालिका माता मंदिर पर वर्षाकाल में किसानों द्वारा फसलों का उत्पादन बाद नवई की परंपरा का निर्वहन करते हुए ग्रामीण भक्तों की माताजी के दर्शन-पूजन के लिए भारी भीड़ जुट रही है। जिले में इस समय आदिवासी परंपरा का एक मुख्य नवई पर्व (Navai festival) बड़े ही हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया जा रहा है।

आस-पास के ग्रामीण अंचल देवझरी, कुशलपुरा, उमरी, करडावद, रंगपुरा आदि स्थानों से ग्रामीणजन नवई बाद मुख्यालय के मंदिरों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में पहुंचकर नवई पर्व (Navai festival) का पहला भोग भगवान को लगा रहे हैं।

जिसमें महिला पुरुष और बच्चे भी नवई के लिए भगवान के दरबार में पहुंचकर भगवान के चरणों में ककड़ी-भुट्टे, मंूगफली भोग के रूप में अर्पण कर अच्छे व्यापार-व्यवसाय के लिए प्रार्थना करने के साथ क्षेत्र में अच्छी वर्षा और खुशहाली के लिए भी प्रार्थना कर रहे है।
प्रथम पूजनीय गणेशजी को प्रिय है ककड़ी

उत्सवों के माहौल के बीच आदिवासी अंचलों में इन दिनों नवई पर्व की अच्छी खासी धूम मची हुई है। इस वर्ष फसलों की दृष्टि से बरसात भी अच्छी हुई और कोरोना महामारी का कोई भय भी नहीं है, इसलिए आदिवासियों में अत्यधिक उत्साह देखने में मिल रहा है।

ज्ञातव्य रहे कि देवो के प्रथम पूज्यीन भगवान श्री गणेशजी के पर्व के दौरान ही जिलेभर में बाजारों में बड़ी तादाद में ककड़ी-भुट्टू, मंूगफली बिकने के लिए आ जाती है, और सीजन में लोग इनकी जमकर खरीदी भी करते है।

ककड़ी का प्रसाद गजानन महाराजजी को भी अत्यंत प्रिय है, इसलिए बाप्पा की प्रसादी के रूप में भक्तजन इसका उपयोग करते है तथा हर कोई व्यक्ति इस सीजन में ककड़ी, भुट्टे, मंूगफली का बड़े चाव के साथ लुत्फ उठाता है।

पहला भोग लगता है स्थान देवता एवं ग्राम देवता को
बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग अपनी नई फसल का पहला अंश लेकर स्थान देवता और ग्राम देवता सहित समीपस्थ नगरों के देवालयों में पहुंचकर बड़ी श्रद्धापूर्वक चढ़ाते हुए नजर आ रहे है।

मान्यता है कि आदिवासी परंपरा में नई फसल आने के बाद फसल से आजीविका आरंभ करने से पूर्व ग्राम देवता और भगवान को अर्पण करने से ना केवल व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलता है, अपितु मान्यता यह भी है कि विधिवत् पूजन-पाठ के साथ यह सामग्री अर्पण करने से परिवार से सुख-शांति एवं समृद्धि भी बनी रहती है।

नवई पर्व (Navai festival) के दिन खुशी का रहता है वातावरण

जिस किसान के घर नवई पर्व मनाया जाता है। इस दिन परिवार की बेटियों और बहनों तथा उनके बच्चों को बुलाकर पहले उन्हें नूतन फसल के व्यंजन बनाकर खिलाए जाते हैं। तत्पश्चात इसे घर के सभी सदस्य ग्रहण करते हैं।

नवई के मौके पर आने वाली बहनों एवं बेटियों को नए वस्त्र भी प्रदान किए जाते हैं। इस पर्व के कारण वस्त्र व्यवसायियों एवं मिठाई की दुकानदारों के व्यापार में इन दिनों बढ़ोतरी हो जाती है। मेहनमान नवाजी का भी दौर चलता है। किसान महिला-पुरूष शहरी एवं नगरीय क्षेत्रों में उनसे नजदीकी से जुड़े लोगांे को भी निःशुल्क रूप से खाने के लिए ककड़ी‘-भुट्टे प्रदान करते है।

नृत्य के साथ गाते है गीत

नवई को लेकर किसान परिवारों में भगवान के प्रति अटूट आस्था एवं श्रद्धा जुड़ी रहती है। इस मौके पर आदिवासी समुदाय के लोगों द्वारा अपनी खुशी का इजहार करते हुए पांरपरिक वाद्ययंत्रों के माध्यम से सामूहिक रूप से नृत्य भी किया जाता हैं, तथा परिवार की महिलाओं द्वारा आदिवासी परंपरा के गीत गाकर नई फसल आने की खुशी को अभिव्यक्त करती है।

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