ओंकारेश्वर: नर्मदा के प्रमुख घाट बहे, तो कुछ पत्थरों के मलबे में दबे, प्रसिद्ध बिशल्या घाट बहा

  • नर्मदा के प्रमुख घाट बहे, तो कुछ पत्थरों के मलबे में दबे।
  • प्राचीन बिशल्या घाट पंहुचने के लिये 40 मीटर का RCC से बना मार्ग बाढ़ में बहा ओंकार पर्वत परिक्रमा मार्ग की दीवार बही

मंगल सिंह ठाकुर ओंकारेश्वर. ओंकारेश्वर में नर्मदा का जलस्तर जैसे-जैसे कम हो रहा है, बाढ़ से मची तबाही का मंजर ऊभर कर सामने आने लगा है। हालांकि रविवार सुबह सामान्य से करीब 2 मीटर ऊपर नर्मदा का जलस्तर बना हुआ हैं।

पिछले दिनों ओंकारेश्वर बांध के 21 गेटो से लगभग 34000 क्यूमेक्स पानी लगातार छोडे जाने के बाद बाढ़ से सैंकड़ों लोगों के प्रभावित होने की खबर है। जिन इलाकों से पानी उतरना शुरू हो गया है, वहां अब बाढ़ से मची तबाही का मंजर साफ दिखाई दे रहा है।

ओंकारेश्वर बाँध से छोडे गये पानी में सैंकड़ों टन मलबा बाढ़ में बहकर ओंकारेश्वर के प्रमुख घाटों पर जमा हो गया हैं कई घाट अपना वास्तविक स्वरुप ही खो चुके हैं तो कोई घाट पंहुच मार्ग ही गायब हो गया हैं। नर्मदा का जैसे जैसे जल स्तर कम होता चला जा रहा है,

वैसे-वैसे नुकसानी ऊभरकर सामने आ रही हैं ओंकारेश्वर का प्रमुख ब्रम्हपुरी घाट पर बाँध के निचले क्षैत्र में पडा सैकड़ों टन मलबा बह कर घाट पर जमा हो गया हैं जिससे संपूर्ण घाट मलबे का निचे दब गया हैं। इसी प्रकार नया झुला पुल के निचे स्थित प्राचीन बिशल्या घाट पर RCC से बना पंहुच मार्ग ही बह गया है.

तो वही बाणगंगा एवं कोटितीर्थ घाट पर विशालकाय चट्टानें एवं भारीभरक पत्थर आकर जमा हो गये हैं, जिससे 40 मीटर लंबा घाट पत्थरों के ढेर में परिवर्तित दिखाई देने लगा हैं। तबाही का मंजर यही खत्म नही होता हैं।

नर्मदा के दक्षिण तट पर स्थित कैवलराम एवं गौमुख घाट पर स्थित पतरों से बनी लगभग 30 दुकानें बह गई हैं कुछ अपना आस्तित्व जिर्णशिर्ण अवस्था में खुद बयां करती दिखाई दे रही हैं।

परिक्रमा मार्ग में बर्फानी धाम से आगे पर्वत परिक्रमा की लगभग 20 फीट दीवार बाढ़ की भेंट चढ़ गई और परिक्रमा मार्ग मात्र 2 फीट का रह गया है जिससे आने वाले समय में परिक्रमा मार्ग बंद हो सकता है.

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