इंदौर शहर में एक बार फिर हुआ, जिला चिकित्सालय में शव का अपमान

जिला चिकित्सालय

राजेंद्र सचदेव इंदौर. यूनिक अस्पताल ग्रेटर कैलाश नर्सिंग होम एम. वाय. अस्पताल के पश्चात अब इंदौर के जिला चिकित्सालय में मृत व्यक्ति के शव का अपमान हुआ है, जिला अस्पताल में 4 दिन से पड़ा शव जब बदबू फैलाने लगा, तब जिला चिकित्सालय के कर्ता-धर्ताओं को रहवासियों द्वारा शिकायत की गई.

तो उन्हें होश आया इंदौर में एम अस्पताल के बाद शासकीय जिला चिकित्सालय में मृत व्यक्ति के शव की फजीहत की गई है आश्चर्य की बात है जिला चिकित्सालय में बॉडी कूलर साडे 3 साल से बंद है और बंद पड़े कूलर को ठीक करने की और किसी ने ध्यान नहीं दिया.

जिला चिकित्सालय की जिम्मेदारी सिविल सर्जन डॉक्टर संतोष वर्मा की है वैसे तो जिला चिकित्सालय में अब कार्य बहुत कम हो गया है क्योंकि जिला चिकित्सालय में निर्माण के कार्य के कारण उसके कई कर्मचारी और विभागों शहर के अलग-अलग अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है.

थोड़ी सी जिम्मेदारी के बावजूद भी लापरवाह सिविल सर्जन डॉक्टर संतोष वर्मा एक छोटी सी जिम्मेदारी कूलर को सुधारने की नहीं कर पाए तो यह डॉक्टर संतोष वर्मा शहर की जनता के स्वास्थ्य का क्या सुधार कर पाएगा इस इस अंदाज लगाया जा सकता है.

जिला चिकित्सालय में लापरवाही है के 2008 में 1000000 रुपए की लागत से बॉडी कूलर लगवाए गए थे और बड़ी-बड़ी घोषणाएं की गई थी की न्यूनतम दर पर यहां पर शव रखने की सुविधा शासकीय जिला चिकित्सालय में इंदौर के जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जाएगी.

परंतु इंदौर के ना करें मट्ठे स्वास्थ्य विभाग के इस जिला चिकित्सालय में 3 साल से बॉडी कूलर खराब है जनता को सुविधा तो नहीं मिल रही उल्टा अस्पताल में आने वाले शव जो पोस्टमार्टम हेतु आते हैं उन्हें भी सुरक्षित ढंग से रखने की व्यवस्था यहां पर नहीं है.

10 लाख के लागत से खरीदे गए बॉडी कुलर को खराब हो जाने के पश्चात उनके सुधारने की ओर कोई ध्यान न देना यह सिविल सर्जन डॉक्टर संतोष शर्मा की घोर लापरवाही है इंदौर का स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से नाकारा और हो चुका है.

शासकीय अस्पतालों में डॉक्टरों का गायब होना अस्पताल में लगे हुए मेडिकल संसाधनों का आए दिन खराब होना आम बात हो चुकी है जिला चिकित्सालय में 4 दिन पूर्व सिमरोल क्षेत्र से अज्ञात पुरुष का शव मिला था उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया था.

पोस्टमार्टम करने के बजाए शव को बॉडी कूलर में रखवा ने के बजाय यूं ही छोड़ दिया गया शव खराब होने लगा बदबू फैलाने लगा रहवासी क्षेत्रों में बदबू फैलने लगी और अस्पताल का इंचार्ज डॉ संतोष वर्मा जो सिविल सर्जन भी है.

कुंभकरण की नींद सोता रहा 4 दिनों में अस्पताल में जाकर अस्पताल में पोस्टमार्टम के रूम में जाकर देखने की अपनी जिम्मेदारी भी नहीं समझी आमतौर पर वर्षों से जमे हुए अंगद के पैर की तरह स्वास्थ्य विभाग में जमे हुए अयोग्य डॉक्टर जो अपनी जिम्मेदारी को भी नहीं समझते अस्पताल की जिम्मेदारी प्राप्त करने के बाद भी जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं,

ऐसे डॉक्टरों को पता नहीं क्यों मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य संचालक ने इंदौर में तैनात कर रखा है. शव की इस फजीहत के बाद सिविल सर्जन डॉक्टर संतोष शर्मा कहते हैं की जिला चिकित्सालय में जल्दी बॉडी कूलर चालू करवाएंगे डॉक्टर संतोष वर्मा से हम पूछना चाहते हैं.

इतने दिनों तक वह किसका इंतजार कर रहे थे बॉडी कूलर ठीक करवाने के लिए किसी मुहूर्त का इंतजार कर रहे थे डॉक्टर संतोष वर्मा के इस बयान से साफ जाहिर है कि वह अपने कर्तव्य के प्रति, अस्पताल के प्रति लापरवाह रहे हैं साढे 3 साल कोई कम समय नहीं होता है.

स्थानीय जनता की मांग है कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को और मध्य प्रदेश के मानव अधिकार आयोग को संज्ञान लेते हुए डॉक्टर संतोष वर्मा का तलब किया जाना चाहिए. मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर प्रभु राम चौधरी जी को इसका संज्ञान लेते हुए तुरंत डॉक्टर संतोष वर्मा जैसे व्यक्ति को सिविल सर्जन पद से हटाते हुए उन्हें ग्रामीण सेवा में भेज देना  चाहिये।

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