निजी हाथों में नहीं जाने देंगे बिजली कंपनियां, कर्मचारी आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार

कर्मचारी बजली

इंदौर. मध्य प्रदेश यूनाइटेड फोरम के घटक संगठन विद्युत अधिकारी कर्मचारी कल्याण संघ द्वारा वर्चुअल मीटिंग आयोजित कर मध्य प्रदेश की विद्युत कंपनियों को निजी हाथों में हस्तांतरित करने की प्रक्रिया बनाए जाने की,

केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई बिडिंग प्रणाली के खिलाफ वर्चुअल मीटिंग कर आपत्ति जताई एवं संगठन पदाधिकारियों द्वारा ऐसे किसी भी स्थिति हेतु संपूर्ण मध्यप्रदेश में तीव्र विरोध प्रदर्शन हेतु रणनीति तैयार की गई।

पूर्व में भी विद्युत अधिकारी कर्मचारी कल्याण संघ के युनाइटेड फोरम द्वारा केंद्र सरकार द्वारा निजीकरण करने के प्रयास के विरोध में निरंतर आंदोलन चलाकर प्रदेश के आम बिजली उपभोक्ताओं एवं बिजली कर्मचारियों के हितों के संरक्षण हेतु संघर्ष किया गया है।

यूनाइटेड फोरम के प्रांतीय सह सचिव एवं विद्युत अधिकारी कर्मचारी कल्याण संघ इंदौर के अध्यक्ष श्री प्रदीप कुमार द्विवेदी ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार जबरन प्रदेशवासियों एवं बिजली कर्मचारियों पर बिजली कंपनियों का निजीकरण थोपने का प्रयास करती है,

तो समस्त बिजली कर्मचारी संगठन के शॉर्ट नोटिस पर बिजली व्यवस्था ठप करने में भी कोई गुरेज नहीं करेंगे। साथ ही संगठन के पदाधिकारियों ने वर्चुअल मीटिंग में मुख्य रूप से निजीकरण, संविदा नियमितीकरण में भाजपानीत सरकार द्वारा की जा रही वादाखिलाफी,

कर्मचारियों की वेतन विसंगति एवं आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण एवं कंपनी प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ मनमानी पूर्ण रवैये पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आंदोलनात्मक गतिविधियों को तेज करने सहित संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने हेतु संकल्प लिया।

बैठक में मुख्य रूप से संगठन पदाधिकारी श्री यशवंत यादव, धर्मेंद्र मालवीया, मिलन चौकसे, किशोर कुशवाह, जाहिद अंसारी, प्रवीण सुहागपुरे, महावीर सिंह, अजय शर्मा, रोहित जी करण, श्यामनाथ सेन एवं प्रदीप डहरवाल सहित प्रदेश के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया एवं संगठन के निर्णयों पर अपनी सहमति व्यक्त की।

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