ऐसा हैरतअंगेज गांव जहां एक साथ रहते हैं इंसान और कोबरा, यहां जानिए इसी तरह के 5 रहस्यमयी गांव

Mysterious Village

Mysterious Village

Mysterious Village: भारत में कई अनूठी चीजें मौजूद हैं। यहां कुछ ऐसे लोग, ऐसे गांव और ऐसे शहर हैं, जहां बड़ी अजीब चीजें होती हैं। यहां का रहन-सहन देख हर कोई भी सोच में पड़ जाता है। इनके बारे में आपने आज तक नहीं सुना होगा और न जाना होगा। ऐसे ही एक गांव (Mysterious Village) है जहां पर इंसान और कोबरा सांप एक साथ रहते हैं। यहां के लोग सांप को घर का सदस्य मानते हैं। आइए आपको कुछ ऐसे ही गांव (Mysterious Village) के बारे में बताते हैं।

ये हैं 5 Mysterious Village

इस गांव में एक साथ रहते हैं इंसान और कोबरा

इस गांव को शेतफल के नाम से जानते हैं। यह गांव पुणे से लगभग 200 किमी दूर सोलापुर जिले में बसा है। इस गांव को अपनी अनूठी परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां पर घर में घातक कोबरा एक घर के सदस्य की तरह रहता है। दरअसल इस गांव के लोग इन सापों की पूजा करते हैं और उनके साथ घर के सदस्य की तरह व्यवहार करते हैं।

सोचने वाली बात यह है कि इन सापों से गांव वालों को अब तक कोई नुकसान नहीं हुआ है। ये सांप घर में कभी भी आ जा सकते हैं और खुलेआम लोगों के बीच घूमते हैं। दुनियाभर से लोग इस गांव को देखने आते हैं।

इस गांव में नहीं है जूते पहनने की इजाजत

इस गांव का नाम वेल्लागवी है और यह कोडाइकनाल हिल स्टेशन के पास बसा है। इस गांव में करीब 200-300 लोग ही रहते हैं। सबसे खास बात यहां पर घर से मंदिरों की संख्या है। इसकी गांव की दूसरी चौंकाने वाली बात यह है कि इस गांव में सिर्फ रहने वाले ही नहीं बल्कि किसी बाहरी को जूता पहनने की इजाजत नहीं है।

अगर इस गांव में कोई भी जूता पहने पकड़ा जाता है तो उसे सजा दी जाती है। इस गांव में पहुंचने के लिए कोई सड़क नहीं बनी है। अगर इस गांव में जाना है तो आपको कुंभकराई से घने जंगलों के माध्यम से ट्रेकिंग करना होगा, जिसमें करीब 8 घंटे लगते हैं।

ऐसा गांव जो दो देशों द्वारा साझा किया गया

इस गांव का नाम लोंगवा नागालैंड है। यह मोन जिले का सबसे बड़ा गांव है। इसके साथ ही ये एक ऐसा अकेला गांव है, जो दो देशों द्वारा साझा किया गया है। दरअसल भारत-म्यांमार की सीमा इस गांव के बीच से होकर गुजरती है, जो गांव के मुखिया के घर को 2 हिस्सों में बांटती है। एक हिस्सा भारत में और दूसरा हिस्सा म्यांमार में है।

अलग-अलग रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के अपने शासन के अंतिम दिनों में ब्रिटिश मानचित्रकारों द्वारा सीमा का निर्माण किया गया था। यह सीमा 1970-71 में खींची गई थी। दोनों गांव रहने वाले लोग कोन्याक जनजाति से ताल्लुक रखते हैं। बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा ग्राम प्रधान के घर को बांटती है। इस हिसाब से राजा का परिवार म्यांमार में खाता है और भारत में सोता है।

कुंवारों का गांव

इस गांव का नाम  बरवां कला है। यह बिहार में कैमूर जिले के अधौरा उपखंड में बसा है। इस गांव को कुंवारों के गांव के रूप में भी जाना जाता है। दरअसल इसके पीछे की वजह यह है कि यहां पर 50 साल बाद 2017 में ही गांव में बारात समारोह हुआ था। इस कारण है गांव में  पर्याप्त सुविधाओं का न होना।

2017 पहले इस गांव में पहुंचने का एक तरीका था 10 किमी की ट्रेकिंग करना। इसके बाद यहां के लोगों ने पहाड़ियों और जंगल को काटकर 6 किमी की सड़क बनाई थी। इसके बाद जिस गांव में बिजली, पानी और स्वास्थ्य केंद्र नहीं है,  कई दशकों बाद उस गांव में शादी समारोह हुआ और दुल्हन का स्वगत सेलिब्रिटी की तरह किया गया।

इस गांव के रहने सिर्फ बोलते हैं संस्कृत भाषा

देखा जाए तो देश में संस्कृत प्राचीन भाषा मानी जाती है। इसे देश में ज्यादा प्रयोग नहीं किया जाता है। लेकिन एक ‘मट्टूर’ नाम का एक छोटा सा गांव है, जहां के रहने वाले लोग संस्कृत बोलते हैं। यह गांव कर्नाटक में शिवमोग्गा के पास शिमोगा जिले में स्थति है। वैसे यहां की मूल भाषा कन्नड़ है।

दरअसल यह एक एक गैर-लाभकारी संगठन संस्कृत भारती है, जो एक बोली जाने वाली भाषा के रूप में संस्कृत को लोकप्रिय बनाने के मिशन पर है। साल 1991 में संस्कृत भारती ने मत्तूर में भाषा को बढ़ावा देने के लिए 10-दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें कई जानी-मानी हस्तियों ने भाग लिया। यहां के स्थानीय लोगों ने इस भाषा को स्वीकार किया और गांव के एक स्कूल संस्कार भारती में लगभग 5,000 लोगों को संस्कृत पढ़ाई जाती है।

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