सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में बरी पुलिस अधिकारी की बर्खास्तगी को बरकरार रखा

कोर्ट अधिकारी पुलिस

भले ही अपराधी सरकारी अधिकारी को न्यायालय ने अपराधिक आरोप से बरी कर दिया हो, उसके बाद भी सरकार उस आरोपी सरकारी अधिकारी को बर्खास्त करने का आदेश पारित कर सकती है – सुप्रीम कोर्ट

प्रदीप मिश्रा इंदौर. सुप्रीम कोर्ट के माननीय जस्टिस डी. वाई. चन्द्रचूर्ण और जस्टिस इंदिरा बेनर्जी की पीठ ने “राजस्थान राज्य बनाम हेम सिंह ( सिविल अपील नंबर 3340/2020 ) मामले में अहम निर्णय मे पुलिस अधिकारी सिपाही की बर्खास्तगी को कायम रखते हुए कहा,

कि भले ही अपराधी सरकारी अधिकारी को अपराधिक आरोप से बरी कर दिया गया हो, फिर भी उसे नौकरी से बर्खास्तगी के आदेश को पारित किया जा सकता है। उपरोक्त राजस्थान राज्य बनाम हेम सिंह केस में हेम सिंह को हत्या के एक मामले में नामजद एफ आई आर मे आरोपी बनाया गया था।

और बाद में भादवि की धारा 302,201 और 120 b के तहत न्यायालय मे चालान पेश किया गया था! उसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण कायम होने की वजह से राजस्थान सिविल सेवा नियमों और प्रावधानों के तहत पुलिस विभाग द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी.

बाद मे सत्र न्यायालय ने आरोपी पुलिस वाले और सह अभियुक्त को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। लेकिन पुलिस विभाग द्वारा न्यायालय मे आरोपी पुलिस वाले के ख़िलाफ़ पेश किए गए सबूतों के आधार पर अनुशासनात्मक जांच की गई,

और चूंकि न्यायालय ने उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी किया था! और उसके खिलाफ न्यायालय मे आरोप स्थापित किए गए थे इन सब को मद्देनज़र रखते हुए पुलिस विभाग ने आरोपी पुलिस सिपाही हेम सिंह को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया.

आरोपी सिपाही ने हाई कोर्ट में अपनी बर्खास्तगी के निर्णय के ख़िलाफ़ याचिका दायर की और बर्खास्तगी के निर्णय को रद्द करवाया। सरकार द्वारा राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट मे अपील दायर की.

उपरोक्त अपील मे सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह निर्देशित करते हुए कि न्यायालय से बरी होना का निष्कर्ष विभागीय जांच का निष्कर्ष नहीं हो सकता है कहते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के आरोपी पुलिस सिपाही हेम सिंह की बहाली के आदेश को दिनांक 29 /10/2020 रद्द कर दिया.

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