उज्जैन का सुशांत: धनवान और बलवान के आगे नत-मस्तक गोविंद की संदिग्ध मौत का न्याय

गोविंद

जय कौशल उज्जैन. सिंधी समाज के युवा व्यापारी गोविंद रामचंदानी की मौत का रहस्य शायद तिहरे केसवानी हत्याकांड की तरह अनसुलझा ही रहेगा. जिस तरह सालों पहले फ्रीगंज के व्यापारी के तीन सदस्यों को दुर्दांत हत्यारे ने धनतेरस की पूर्व की स्याह रात्रि को मौत की नींद सुला दिया, न्याय

जिसमें एक अधेड़पुत्र ,एक व्रद्ध माँ और एक जवान पोती ने अपने प्राण गंवा दिए थे. और सिंधी समाज ने बदनामी के डर से उस मामले को दबा दिया था. ठीक उसी तरह गोविंद की मौत के असल कारण और उसके गुनाहगारों के राज को दफ़्न करने में गोविंद के अपनों ने ही अहम भूमिका अदा की है.

हालांकि हमने अपना दायित्व पूरी ईमानदारी से निभाया है और आगे भी निभाएंगे. लेकिन गोविंद और सुशांत जैसे युवा कब तक इस तरह से अर्थपिशाचों के चक्कर में आ कर अपनी बेशक़ीमती जान को गंवाते रहेंगे ये हमें सोचना है.

न्याय की आस में दर-दर भटके

गुरुवार को सिंधी समाजजन अपने समाज के युवा व्यापारी को न्याय दिलवाने के किए दर दर भटकते नज़र आए. कभी कलेक्टर कार्यालय, तो कभी आईजी, डीआईजी और एसपी ऑफिस में न्याय के लिए गुहार लगाते हुए ज्ञापन देते रहे.

निष्पक्ष जाँच और गोविंद के असली गुनाहगारों को सजा की मांग कर रहे थे सिंधी समाजजन हालांकि आश्वाशन ही हाथ लगा इन न्याय की आस करते समाजजनों को और उम्मीदों के साथ ये लोग वापस लौट आए. लेकिन न्याय शायद इनकी किस्मत में नहीं है क्योंकि वो तो,

बलवान और धनवान के रसूख़ के आगे नतमस्तक होता नज़र आ रहा है. इस दौरान समाज के किशन भाटिया,मोहन वासवानी,दीपक बेलानी,दयाल वाधवानी,चंदीराम जेठवानी,महेश गंगवानी,लोकेश आडवाणी,दीपक वाधवानी सहित अन्य मौजूद रहे.

जाँच की आँच, सुलगने से पहले ही हुई मंद

इस खुदकुशी के मामले में चौंकाने वाले कई बिंदु ऐसे थे कि कोई ग़ैर क़ानूनी जानकर जो साधारण से हों वो बता दें कि पुलिस को क्या करना था और पुलिस ने क्या किया. दरअसल किसी भी आत्महत्या में पुलिस सबसे पहले वो ख़त ढूंढती है,

जो जिसे सोसाइट नोट कहा जाता है. इस मामले में वो होने के बाद भी नहीं मिला. फिर मरने वाला का मोबाईल फोन खंगाला जाता है जिसके डेटा से बहोत कुछ हासिल करके एक निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है.

लेकिन इस मामले में मोबाईल की अहमियत पुलिस ने नहीं समझी और आज तक मृतक का मोबाईल जप्त नहीं किया गया. मृतक की बेशक़ीमती कार का वारदात के 8 वें दिन खुलासा होने के बाद भी पुलिस ने कार को लेकर कोई तफ़्तीश करने की ज़हमत नहीं उठाई.

इसके बाद जो व्यक्ति पहले से ही मृतक की बीबी और उसके ससुराल पर उंगलियां उठाता रहा और उन्हें ही गोविंद की मौत का जिम्मेदार बताता रहा उस पर किसी भी तरह की शंका कुशंका ना करते हुए. आत्महत्या के मुख्य कारण को ही दबाने का कारनामा जीवाजीगंज पुलिस ने बख़ूबी किया.

हालांकि मैं ख़ुद कोई क़ानून का बड़ा जानकार नहीं हूं. लेकिन अपने बरसों के अनुभव के दम पर उपरोक्त बिंदुओं पर कोर्ट में खड़ा हो जाऊं तो माननीय न्यायालय इन बिंदुओं की बारीकी को परख कर पुलिस को निष्पक्ष जाँच करने का आदेश तो दे ही सकती है.

ख़ैर जब मृतक के परिजन खुद गोविंद को न्याय दिलवाने के इच्छुक नहीं तो आप और हम क्या कर सकते हैं.

बलवान और धनवान पथभृष्ट करते गोविंद जैसे युवाओं को

सूत्रों का कहना है कि युवा व्यवसाई गोविंद पहले हर साल धार्मिक यात्राओं पर जाता था. वो कभी बद्रीनाथ,केदारनाथ जैसे स्थलों पर जाना पसंद करता था.लेकिन जब से वो धनवान और बलवान के चक्कर मे पड़ा तो गोआ, बैंकॉक जाने लगा.

सौंफ सुपारी नहीं खाने वाला गोविंद बुरी लतों में पड़ गया. और ये सब धनवान और बलवान की संगत से ही सम्भव हुआ. सिंधी समाज को अपने युवाओं को ऐसे दुर्जनों अर्थलोभीयों से बचाने की जरूरत है.इन बलवान और धनवान के अय्याशी के किस्से कम नहीं हैं.

ये युवाओं को फंसा कर उनके पैसों से ही ऐश करते हैं.और पैसा भी इनका ही होता है जो ये उन्हें सूद पर देते हैं. अंजुश्री में रशियन पार्टी हो या फिर मनग्रोला में रक्कासों का मुजरा हो.ये गौरखमंडली अय्याशी के लिए प्रसिद्ध है.

इनके आका बिरयानी का पैसा ये सूद पर चला कर गुंडों की तरह वसूली करते हैं. जब तक उसमें देने की ताक़त होती है उसे चूसते रहते हैं और फिर घर, गाड़ी, दुकान अपने नाम लिखवा लेते हैं. मासूम गोविंद के साथ भी यही किया इन अर्थलोभीयों ने और एक कदम आगे बढ़ते हुए उसे प्रेम जाल में फंसा का इतना प्रताड़ित किया कि वो जान देने पर मजबूर हो गया.

अब ये इस कहानी का अंत है या शुरुआत ये तो समय के गर्भ में है. लेकिन अगर पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से अब भी छानबीन हो जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो कर सच्चाई सामने आ सकती है. न्याय की आस में सिंधी समाज ही नहीं हम भी हैं. और हमें भी उम्मीद ही नहीं विश्वास है कि गोविंद को न्याय अवश्य मिलेगा. मरने के बाद ही सही.

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